मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े वहम

१. मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम बुद्धि का संकेत देती हैं

इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझने वाले लोगों में बुद्धि का स्तर कम होता है। मानसिक बीमारी किसी को भी हो सकता है, यह उसकी बुद्धिमत्ता या सामाजिक अथवा आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं करता।

२. मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या व्यक्ति की कमजोरी का संकेत है

मानसिक बीमारी किसी व्यक्ति की कमज़ोरी या आलस्य का संकेत नही है। बचपन का सदमा और तनाव जैसे कई कारक हैं जो किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। यह किसी व्यक्ति के कमजोर रवैये, सुस्त बर्ताव या इच्छाशक्ति की कमी का उल्लेख नहीं करता है।

३. बहुत लोगो के साथ उठने बैठने वाले लोगो को मानसिक बीमारी नहीं हो सकती

इस बात का कोई प्रमाण नहीं है। लोगों की एक बड़ी मित्र मंडली हो सकती है और फिर भी वे अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं। यह ज़रूर है की आस पास देखभाल करने वाले लोग हों तो अवसाद और कुछ प्रकार की मानसिक बीमारियों से लड़ने में मदद मिल सकती है, पर सिर्फ एक बड़ी मित्र मंडली होने से मानसिक स्वस्थ्य संबंधी समस्याएं रोकी नहीं जा सकती।

४. बच्चो को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं नहीं होती

शोध बताता है कि बच्चे भी मानसिक बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।  मानसिक बिमारियों से जूझने वाले बच्चों के परिवारजन अक्सर इस स्थिति को नजरअंदाज कर देते हैं, पूछते हुए कि ‘उन्हें क्या ही तनाव है?’ और तो और चिकित्सक सुझाव देते हैं कि शीघ्र निदान बच्चे को उपचार में मदद कर सकता है।

५. मानसिक रोगों से पीड़ित सभी लोग हिंसक होते हैं

भले ही कुछ मानसिक रोगी हिंसक हो सकते हैं, परंतु मानसिक रोग हिंसा का स्रोत नहीं होता है। यह एक खतरनाक मिथक है जो लोगों को मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों से दूर रखता है और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को कलंक के रूप में पेश करता है।

-Yash

मासिक धर्म से जुड़े अन्धविश्वास – भाग

क‌ई संस्कृतियों में मासिक धर्म को वर्जित माना जाता रहा है। इसका मुख्य कारण मासिक धर्म के साथ जुड़े कई अंधविश्वास हैं। इन अंधविश्वासों को मिटाने के लिए इनकी जड़ों को समझना जरूरी है। आज हम एसे तीन अंधविश्वासों का वर्णन करेंगे और उन्हें खारिज करेंगे।

१. मासिक धर्म के दौरान मंदिर नहीं जाना चाहिए और लोगों से बातचीत नहीं करनी चाहिए।

ऐसा इसलिए था क्योंकि लंबे समय तक मासिक धर्म के रक्त को अशुद्ध माना जाता था एवं आज भी माना जाता है। किन्तु जीवविज्ञान के अनुसार यह रक्त अशुद्ध नहीं है, यह तो गर्भाशय की दीवार का बहाव और माहवारी के अगले चक्र की तैयारी है। इसके अलावा पुराने समय में महिलाएं अबद्ध खून बहाव करतीं थीं जिसकी गन्ध जीव जंतु एवं रोगाणु को आकर्षित करती होगी, ओर शायद इस कारण औरतों से घर में रहने की उम्मीद की जाती होगी। आज हमारे पास मासिक धर्म सम्बन्धी उत्पादों की बहुतायत है, इसलिए महिलाओं को माहवारी के दौरान लोगों से दूर रहने की जरूरत नहीं है।

२. मासिक धर्म वाले व्यक्ति के छूने से आचार ख़राब हो जाएंगे।

आचार केवल नमी के सम्पर्क में आने से ख़राब होते हैं, अन्य किसी कारणवश नहीं। हालांकि यह सम्भव है पीरियड्स के दौरान हाथों को अधिकत्तम धोनें से उनमें नमी रह जाए और उन हाथों के छूने से आचार ख़राब हो जाएं।

३.  स्नान नहीं करना चाहिए।

ऐसा क्यों? इसके पीछे भी यही वजह है कि पुराने समय में महिलाएं अबद्ध रक्त बहाव करतीं थीं एवं तालाबों और झीलों में नहाती थीं जिसकी वजह से पानी दूषित हो सकता था। किन्तु आज हम मासिक धर्म स्वच्छता के मामले में बहुत आगे बढ़ चुके हैं और किसी व्यक्ति के माहवारी के दिनों में स्नान का दूसरों पर कोई असर नहीं पड़ता।

-Pankaj

कोरोना वायरस संकट : कब्रिस्तान और शमशान कर्मी

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन 4000 लोगों की मृत्यु कोरोना वायरस  और स्वास्थय सुविधाओं की कमी के कारण हो रही है। जो लोग अंतिम संस्कार व शव दफ़न करने का कार्य करते हैं उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) पहनने की हिदायत दी गयी है। इस उपकरण मैं दस्ताने, मुख-कवच, चश्मे,बंद जूते और मास्क होना आवश्यक है।हालांकि कोरोना वायरस का संक्रमण हैजे की तरह शव से होने की संभावना काम है, किन्तु शव को संभालते वक़्त स्राव या शारीरिक द्रव्यों से हो सकता है।  संक्रमित शव के फेफड़ों अथवा अन्य अंदरूनी अंगों में भी जीवित वायरस हो सकते हैं। जैसे जैसे मृतकों की संख्या बढती जा रही है, शमशाम कर्मियों को दिन रात काम करना पड़ रहा है। इनका टीकाकरण नहीं हुआ है और परीक्षण के साधन व उपकरणों की भी कमी है। इनके पास खाने, आर्थिक सहयोग और मानसिक स्वास्थय सुरक्षा के कोई साधन नहीं हैं।  इनमें से कई कर्मियों को सामाजिक जातिवाद का सामना करना पड़ रहा है, क्यूंकि ये ऐतिहासिक रूप से उत्पीड़ित समुदाय से सम्बंधित हैं। अब समय आ गया है के हम उनकी भूमिकाओं को समझें और उनको इस महामारी में अकेला ना छोड़ें। 

प्रतिरक्षा क्या होती है ?

संक्रामक रोगों का निवारण करने की शरीर की शक्ति को प्रतिरक्षा (Immunity) कहते हैं। रक्त में उपस्थित कई अणु और कोशिकाएँ  शरीर की रक्षा के प्राकृतिक साधन हैं, अणु और कोशिकाएँ ब्राह्य वस्तुओं और विषाणुओं को शरीर में प्रविष्ट नहीं होने देती, अणु विशेष रूप से रोगज़नक़ रोगाणुओं पर प्रतिरक्षा कोशिकाओं से अणुओं को बांधते हैं और उन्हें संक्रमण फैलाने से रोकते हैं, कुछ प्रतिरक्षा कोशिकाएं विशेष प्रकार के रोगज़नक़ रोगाणुओं से लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली लगभग सभी जीवों जैसे पौधे और जानवरों में मिलती है।

क्या हमारे शरीर में विषाणु के विरुद्ध प्रतिरक्षा क्षमता होती है ?

विषाणु जब शरीर में प्रविष्ट होते हैं, तब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली रक्त में उपस्थित अणु और कोशिकाओं की मदद से रोगजनकों कोशिकाओं को पहले पहचान और फिर मार कर शरीर की रोगों से रक्षा करती है। पोषक की प्रतिरक्षा कोशिकाओं के कुछ प्रोटीन अणु वायरस पर विशिष्ट प्रोटीन से बंधते हैं।

परंतु कुछ विषाणुओं का रूपांतर तेजी से होता है और यह स्वयं का अनुकूलन इस प्रकार करते हैं कि प्रतिरक्षा प्रणाली से बचकर सफलतापूर्वक अपने पोषक को संक्रमित कर सकें।

टीकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?

कुछ मामलों में टीकाकरण शरीर की प्रतिरक्षा प्रक्रिया को उत्प्रेरित करने का काम करता है जिससे  वह किसी निश्चित रोगज़नक़ रोगाणु से शरीर की रक्षा कर सके. टीके ऐसे सूक्ष्म जीवों से बनते हैं जो ऐसी स्तिथियों में हैं जिसमें उनकी रोग प्रेरित करने की क्षमता निष्क्रिय है। कभी – कभी टीके ऐसे सूक्ष्म जीवों से  भी बनते है जो मर गए हैं और अब संक्रामक नहीं रहे, प्रतिरक्षा उत्पन्न करने के लिये रोगों के जीवाणुओं को शरीर में टीके द्वारा प्रविष्ट किया जाता है। किसी निश्चित टीके से केवल निश्चित रोग के विरुद्ध प्रतिरक्षा उत्पन्न होती है ना की सभी तरह के संक्रामक रोगों के विरुद्ध। खसरा, हैजा, चेचक के टीके इसके उदाहरण हैं।

COVID-19 नामक रोगाणु से लड़ने की प्रतिरक्षा क्षमता मानव शरीर में नहीं है. इनकी रोकथाम के लिए कोई टीका या विषाणुरोधी अभी उपलब्ध नहीं है । संक्रमण से दूर रहने के लिए सामाजिक दूरी का पालन करें, अपने हाथों को साफ रखें और अन्य निवारक उपायों का पालन करें।

N-COVID19 एक जैव हथियार (Bio-weapon) क्यों नहीं है?

जब से कोरोनावायरस का प्रकोप शुरू हुआ, अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि वायरस प्रयोगशाला में बना हुआ है। अमेरिका के कुछ लोगों ने दावा किया कि वायरस का निर्माण वुहान में चौथे स्तर की जैव सुरक्षा लैब (biosafety lab) में किया गया था। चौथे स्तर की जैव सुरक्षा प्रयोगशालाएं वो स्थान हैं, जहां शोधकर्ता इबोला (Ebola) वायरस जैसे दुनिया के सबसे घातक रोगजनकों में से कुछ का अध्ययन करते हैं। इन जैव सुरक्षा प्रयोगशालाओं को उच्च स्तर की सुरक्षा के साथ निर्माण किया गया है। इस तरह की लैब की मौजूदगी से यह साबित नहीं होता है कि n-covid​​19 को आनुवंशिक रूप से संपादित किया गया था और इसे बनाया गया था।

कुछ चीनी दावा करते थे कि वायरस अमेरिकी सेना द्वारा लाया गया है। लेकिन वैज्ञानिकों ने महसूस किया कि n-COVID19 वायरस से मिलता जुलता है जो चमगादड़ और पैंगोलिन को मनुष्यों से ज्यादा संक्रमित करता है! यदि n-COVID19 वास्तव में एक जैव-हथियार था, तो यह पहले से ज्ञात वायरस से तैयार किया गया होगा जो मनुष्यों के लिए घातक है। वायरस की आनुवंशिक जानकारी (RNA) का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने इसके परिवार के पेड़ का निर्माण किया. एक परिवार का पेड़ हमें बता सकता है कि वायरस की आनुवंशिक जानकारी एक मेजबान से दूसरे में कैसे पहुंचाई जाती है। उनके अनुसार, वायरस कुछ जानवरों से मनुष्यों में कूद गया।

जैव-हथियार (Bio-weapon) क्या है?

अतीत में, बैक्टीरिया और कवक जैसे वायरल जीवों द्वारा जारी हानिकारक विषाक्त पदार्थों को जैविक हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया गया है। संघर्षों के दौरान व्यक्तियों या दुश्मन आबादी को संक्रमित करने के लिए इन रोगजनकों को जानबूझकर जारी किया जाएगा। उदाहरण के लिए, बैसिलस एन्थ्रेसिस, बैक्टीरिया जो रोग एंथ्रेक्स का कारण बनता है, एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

अधिकांश रोगजनकों जो कि जैव हथियार के रूप में उपयोग किए जाते हैं, घातक बीमारियों का कारण बनते हैं। जबकि n-COVID19 एक गंभीर बीमारी का कारण बना है, जो उच्च दर पर नहीं मारता है। इसलिए, इस दावे को वापस करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि n-covid19 एक जैव हथियार है!

मच्छर एन-कोविड19 (n-COVID19) का फैलाव नहीं करते

नॉवेल(n)-कोविड19 इंसानों की श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता हुआ हमें संक्रमित करता है। हालांकि मच्छर, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी विभिन्न बीमारियों के स्रोत के तौर पर जाने जाते हैं पर वे n-कोविड19 वायरस को धारण नहीं करते। जो मच्छर n-कोविड19 वायरस के संक्रमित व्यक्ति को काट भी लें, वह भी इसे अन्य व्यक्ति में स्थानांतरित नहीं कर सकते। अभी तक मच्छरों के द्वारा n-कोविड19 वायरस के फैलने वाले दावे का कोई भी प्रमाण नहीं है। स्वयं को संक्रमण से बचाने के लिए, संक्रमितों से सामाजिक दूरी(सोशल डिस्टेन्सिंग) बनाए रखने का पालन करें। सामाजिक दूरी से संदर्भ है संक्रमित व्यक्तियों अथवा संक्रमण के लक्षण दिखाने वाले व्यक्तियों के क़रीबी संबंध से बचना। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सूखी खाँसी(बिना बलगम वाली), बुखार तथा थकान इस बीमारी के आम लक्षण हैं।

विषाणु: क्या है?

विषाणु एक सूक्ष्म जीव है । ये विषाणु अन्य जीवों, जैसे की पौधों, पशुओं और मनुष्यों को संक्रमित कर सकते हैं। ऐसा करने से ये जीवों मैं रोग फैला सकते हैं, जिनसे प्राणी की मिर्त्यु भी हो सकती है। मनुष्यों की तरह विषाणुओं में कोशिकाएं नहीं होती। इसलिए इन्हें बढ़ने के लिए मेज़बान कोशिकाओं की ज़रुरत होती है।अधिकांश वायरस में निम्नलिखित तीन भाग होते हैं  – एक रासायनिक संरचना जो वायरस के बारे में जानकारी रखती है, एक सुरक्षात्मक परत और एक बाहरी लिफाफा।
अधिकाँश जीवों में ऐसी ही  रासायनिक संरचना होती है, जिसमें आनुवंशिक जानकारी होती है। इन्हें DNA व RNA कहा जाता है। विषाणुओं मैं केवल RNA ही होता है। विषाणु हमारी कोशिकाओं पर कब्ज़ा कर के अपने प्रोटीन बनाने लगते हैं। इस से विषाणु अपनी प्रतिलिपियाँ हमारी कोशिकाओं में बना लेते हैं। प्रतिलिपियाँ बनाने के बाद, कोशिका फट जाती है और विषाणु फैल जाते हैं।कभी-कभी कई प्रतियाँ बनाते समय, रसायन द्वारा की गई जानकारी संरचनाएं बदल सकती हैं। इस  स्थिति में उपचार ढूंढना मुश्किल हो जाता है ।SARS, इन्फ्लुएंजा, और n-COVID विषाणु मनुष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। हाल ही में n-COVID 19 विषाणु पशुओं को संक्रमित कर रहा था और चीन में पशुओं से मनुष्यों में फैल  गया ।